फीकी - फीकी सी है ये महफ़िल सूना -सूना हर साज़ है लगता है कोई नाराज़ है। पूनम का चाँद बुझा - बुझा सा है शब् सर्द काली आज है लगता है कोई नाराज़ है। लब ख़ामोश , आँखें भी खफा हैं दिल में कुछ गहरे राज़ हैं लगता है कोई नाराज़ है। ज़र्द चेहरा, लफ्ज़ो में बेरुखी सी है बिगड़ा हुआ सा हर अंदाज़ है लगता है कोई नाराज़ है। थमने लगी हैं मेरी भी सांसें धड़कनो का राग बेसाज़ है लगता है कोई नाराज़ है। Madhuryaa
जो मशहूर हुए सिर्फ उन्होंने ही तो महोब्बत नहीं कि "साहब"....
ReplyDeleteकुछ लोग चुपचाप भी तो क़त्ल हुए हैं इश्क़ में..!!!
ज़रूरी तो नहीं कि सब कुछ हासिल ही हो जाए....
ReplyDeleteकुछ लोग ना मिल कर भी दिल में आख़री साँस तक धड़कते है...!!!
आप जिनके अफ़साने पढ़कर रो देते हैं,
ReplyDeleteसोचो उन किरदारों पर क्या गुज़री होगी।
तेरी खुशबू, तेरी चाहत, तेरी यादें लाये हैं.. आज फिर मेरे शहर में बादल आये हैं..!!
ReplyDeleteकाले और गोरे दोनो रंगों पर कहर है,
ReplyDeleteवो थोड़ी सांवली है मगर जहर है..!!
❤️❤️❤️
आके बस जाओ तुम उस शहर में...
ReplyDeleteजिस शहर में हें मेरा ठिकाना...
घर बना लो तुम मेरे दिल में...
ये दिल है अब तेरा दीवाना...