Popular posts from this blog
Poetry by Madhuryaa
मत जाना हमारे चेहरे की खामोशी पर हम ज़ेहन में तूफान लिए फिरते हैं। हक़ीकत जानते हैं हर बदलते चेहरे की नज़र मे आईनों की दुकान लिए फिरते हैं। यूँ तो खड़े हैं बुजुर्गियत के दर पर मगर दिल में बचपन के कुछ अरमान लिए फिरते हैं। उनसे कह दो न सिखाएँ हमे जिंदगी का हुनर जो खुद चेहरा बेजान लिए फिरते हैं। इश्क-ओ-अमन की बात हो तो आओ बैठो कुछ देर ना आएँ वो जो नफरतों का सामान लिए फिरते हैं। कई मुल्कों में घर बना लिया, बड़े रईस हो तुम हम तो दुनियाँ भर में हिन्दुस्तान लिए फिरते हैं। सुनो कोई ऐरा गैरा न समझ लेना हमे तुम हम शायर हैं लफ्ज़ों में सारा ज़हान लिए फिरते हैं।
Beautiful love shayari उन्ही से प्यार करते हैं।
बुलाते हैं कभी हंसकर कभी बेज़ार करते हैं। न वो इनक़ार करते हैं न ही इज़हार करते हैं। राज़ दिल के बयां करती हैं सब उनकी हसीं आँखे। मगर ज़ुर्रत नहीं होती की उनमे जाके हम झाँके। हैं वो बेशक़ हमें प्यारे जान भी है मगर प्यारी। है उनकी हर अदा क़ातिल बसी बातों में अय्यारी। बता सकता है जौहरी ही सही क़ीमत नगीने की। मुहब्बत में सभी रखते हैं ख़्वाहिश साथ जीने की। वजह इतनी सी है की हम उन्हें खोने से डरते हैं। वो हमसे ना सही पर हम उन्ही से प्यार करते हैं। Madhuryaa







































What a lovely collection of beautiful pics...
ReplyDelete