बुलाते हैं कभी हंसकर कभी बेज़ार करते हैं। न वो इनक़ार करते हैं न ही इज़हार करते हैं। राज़ दिल के बयां करती हैं सब उनकी हसीं आँखे। मगर ज़ुर्रत नहीं होती की उनमे जाके हम झाँके। हैं वो बेशक़ हमें प्यारे जान भी है मगर प्यारी। है उनकी हर अदा क़ातिल बसी बातों में अय्यारी। बता सकता है जौहरी ही सही क़ीमत नगीने की। मुहब्बत में सभी रखते हैं ख़्वाहिश साथ जीने की। वजह इतनी सी है की हम उन्हें खोने से डरते हैं। वो हमसे ना सही पर हम उन्ही से प्यार करते हैं। Madhuryaa
जो मशहूर हुए सिर्फ उन्होंने ही तो महोब्बत नहीं कि "साहब"....
ReplyDeleteकुछ लोग चुपचाप भी तो क़त्ल हुए हैं इश्क़ में..!!!
ज़रूरी तो नहीं कि सब कुछ हासिल ही हो जाए....
ReplyDeleteकुछ लोग ना मिल कर भी दिल में आख़री साँस तक धड़कते है...!!!
आप जिनके अफ़साने पढ़कर रो देते हैं,
ReplyDeleteसोचो उन किरदारों पर क्या गुज़री होगी।
तेरी खुशबू, तेरी चाहत, तेरी यादें लाये हैं.. आज फिर मेरे शहर में बादल आये हैं..!!
ReplyDeleteकाले और गोरे दोनो रंगों पर कहर है,
ReplyDeleteवो थोड़ी सांवली है मगर जहर है..!!
❤️❤️❤️
आके बस जाओ तुम उस शहर में...
ReplyDeleteजिस शहर में हें मेरा ठिकाना...
घर बना लो तुम मेरे दिल में...
ये दिल है अब तेरा दीवाना...