बुलाते हैं कभी हंसकर कभी बेज़ार करते हैं। न वो इनक़ार करते हैं न ही इज़हार करते हैं। राज़ दिल के बयां करती हैं सब उनकी हसीं आँखे। मगर ज़ुर्रत नहीं होती की उनमे जाके हम झाँके। हैं वो बेशक़ हमें प्यारे जान भी है मगर प्यारी। है उनकी हर अदा क़ातिल बसी बातों में अय्यारी। बता सकता है जौहरी ही सही क़ीमत नगीने की। मुहब्बत में सभी रखते हैं ख़्वाहिश साथ जीने की। वजह इतनी सी है की हम उन्हें खोने से डरते हैं। वो हमसे ना सही पर हम उन्ही से प्यार करते हैं। Madhuryaa
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